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हमारे प्राचार्य 

प्रथम प्राचार्य (डा० श्याम सुन्दर मिश्र)

सन 1989 की जुलाई में सीतापुर जनपद की प्राचीन नगरी बिसवाँ में वहां के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डा० के० जी० मिश्र ने अपने महा प्रयासों से रामदुलारी बच्चूलाल महाविद्यालय की स्थापना की जिसका प्रथम प्रधानाचार्य उन्होंने मुझे बनाया था | लगभग दो वर्ष मै महाविद्यालय की सेवा कर सका | उस समय में मैंने महाविद्यालय के प्रबन्धक डा. के. जी. मिश्र की कर्मठता देखी | उनके प्रयासों से शिक्षा विभाग (उच्च) के एक से एक बड़े पदाधिकारी वहां आयें जिन्होंने कालेज के लिए अपना योगदान किया .. Find out more

द्वितीय प्राचार्य (श्री सोमदत्त शुक्ल)

बच्चूलाल रामदुलारी महाविद्यालय बिसवाँ ऐसी सीतापुर जिले की सबसे बड़ी प्रभावी तहसील में चल कर उजागर हुआ है | यह उच्च शिक्षा का प्रकष्ठ प्रांगण है जिसमें छात्र-छात्रायें अनुशासित ढंग से शिक्षा ग्रहण करते है | अनुशासन हाँ अनुशासन ! धौकनी के चलते, धुँवा उड़ते रूप को अन्यथा में न ले | यहाँ वीरता के तार काढ़े जा रहे है, जिसकी मधुर ध्वनि जन जीवन के हृदयों को झंकृत करती रहती है | इसमें जीवन है आशा है और है ...Find out more

तृतीय प्राचार्य (डा० रमाशंकर मिश्र)

स्वस्ति वचन
वस्तुतः व्यक्ति, भूमि की विरत चेतना की सूक्ष्म किन्तु चैतन्य अभिव्यक्ति है | वह स्वार्थ एवं अहम् के बंधन में जकड़ा, भ्रमपाश में बंधा रहता है | मुक्ति के पश्चात् पुरी निष्ठा से अपने शिष्यों को मुक्त करना तथा उन्हें परिवेश, देश और समाज के कार्य में योजित करना शिक्षाविद का पुनीत कर्तव्य होता है .... Find out more

वर्तमान प्राचार्य (डा० महेंद्र कुमार शुक्ल)

ओ३म् | सहनाववतु | सह नौ भुनक्तु | सह वीर्यं करवावहै |
तेजस्विनावधीतमस्तु | माविद्विषावहै | कठोपनिषद् |
            विद्या का 'दान' परम-पवित्र ईश्वरीय कार्य है । विद्यार्थी को विद्याध्ययन प्रारम्भ करने से पूर्व विद्यादेवी की आराधना करनी चाहिए, साथ ही उक्त वैदिक प्रतिज्ञा भी करनी चाहिए कि हम दोनों (गुरु और शिष्य) परमार्थ हेतु शिक्षा के कार्य में प्रवृत्त होंगें और प्रेमभाव से समत्त्व का जीवन जीते हुए एक दूसरे की......Find out more